मछुआरों के जाल में यहां जब फंसी डॉल्फिन, जानें फिर क्या हुआ?

गांगेय डॉल्फ़िन – प्रतीकात्मक चित्र

बिहार के मुजफ्फरपुर में विलुप्तप्राय डॉल्फिन बुधवार बंदरा के तेपरी में मछुआरों के जाल में फंस गई। लोग उसे देख दंग रह गये। थोड़ी ही देर में ग्रामीणों की भीड़ बूढ़ी गंडक के किनारे आ जुटी। लोग डॉल्फिन को हाथों में लेकर उसके साथ फोटो खिंचाने लगे। कई ने सेल्फी लेकर उसे सोशल मीडिया पर भी वायरल किया। बाद में मछुआरे इस दुलर्भ जलीय जीव को लेकर अलग हट गये। उसके बाद कई मुंह कई बातें होती रहीं।

 लोगों ने बताया कि मछुआरे मछली मार रहे थे। उनकी जाल में वजनदार जीव फंसने पर नौका डगमगाने लगी। फिर सभी जाल को किनारे तक खींच लाये जिसमें से डॉल्फिन निकली। हल्ला हुआ तो आसपास से लोगों की भीड़ जुट गई। पंचायत समिति सदस्य के पति मनीष ठाकुर से जब पूछा गया तो बताया कि डॉल्फिन पकड़े जाने मात्र की जानकारी मुझे हैं। मुखिया पति अरुण कुमार राम ने कहा कि तेपरी में डॉल्फिन मिली। कुछ ग्रामीणों ने उसके साथ सेल्फी लेने के बाद उसे नदी में छोड़ दिया।

हत्था ओपी अध्यक्ष मो. शमीम अख्तर ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली है। हो सकता है कि डॉल्फिन की जगह दूसरी मछली रही हो, लोग पहचान नहीं पाये होंगे। इधर, कुछेक ग्रामीणों ने बताया कि देर शाम तेपरी में वनरक्षियों की एक टीम पहुंची। ग्रामीणों से बात कर कागज पर कुछ लिखा-लिखाया। इस दरम्यान डॉल्फिन को पुन: नदी में छोड़ने की तस्वीर कोई नहीं पेश कर सका।

बंदरा प्रखंड की तेपरी पंचायत में बूढ़ी गंडक नदी में जाल में डॉल्फिन मछली फंस गई। उसे फिर नदी में छोड़ दिया गया है। डॉल्फिन का शिकार नहीं हुआ है।  – डॉ. चंद्रशेखर सिंह, डीएम

जानें डॉल्फिन को :
भारत में गंगा डॉल्फिन उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों में पाई जाती है। सरकार ने इसे भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया है। बिहार के भागलपुर ज़िले में स्थित विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य को लुप्तप्राय गंगेटिक डॉल्फ़िन के लिये संरक्षित क्षेत्र के रूप में नामित किया गया था। कई संगठन फिर से इनके स्वच्छ आवास क्षेत्र में इन्हें बसाने के लिये नदियों का विकल्प तैयार कर रहें हैं जिनमे इन्हें प्रतिस्थापित करके प्रदूषण से दूर रखा जा सके। वर्ल्ड वाइल्डलाईफ फंड की ओर से यूपी में डॉल्फिन संरक्षण एवं उनके आवास में उन्हें फिर से प्रतिस्थापित करने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है और गंगा डॉल्फिन की वार्षिक जनगणना शुरू की गई है।

 बिहार-यूपी की कई नदियां इनका बसेरा :
गंगा, चम्बल, घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, सोन, कोसी, ब्रह्मपुत्र इनकी पसंदीदा अधिवास नदियां हैं। अलग-अलग स्थानों पर सामान्यतः  इसे गंगा नदी डॉल्फिन, ब्लाइंड डॉल्फिन, गंगा सोंस, हिहु, साइड स्विमिंग डॉल्फिन, दक्षिण एशियाई नदी डॉल्फिन आदि नामों से जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम प्लैटनिस्टा गैंगेटिका है। यह सीआईटीईएस (वाशिंगटन कन्वेंशन)के परिशिष्ट 1 में सूचीबद्ध है। आईयूसीएन (अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ) ने इसे लुप्तप्राय की सूची में रखा है।

साभार – हिंदुस्तान दैनिक

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